ऐसी भी शादी होती है , अपने पहले कभी ना सुना होगा न देखा होगा

एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) समुदाय अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, इस बीच बेंगलुरु के माहादेश्वारा हिल्स में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां एक लड़के की दूसरे लड़के से शादी कराई गई। हालांकि यह शादी कोई गे मैरिज नहीं है। इस अनोखी शादी में एक युवक ने दूल्हे की तरह तो दूसरे लड़के ने दुल्हन की ड्रेस पहनी हुई थी। गांववालों का दावा है कि यह शादी पर्याप्त बारिश लाने के लिए की गई पूजा का एक हिस्सा है। गांववालों का मानना है कि इस शादी के पूरी क्षेत्र में समृद्धि आएगी और गांव खुशहाल रहेंगे। दोनों लड़की की यह शादी महाशिवरात्रि के अवसर पर हुई। शादी में शामिल होने के लिए मंदिर में बहुत संख्या में लोग इकट्ठा हुए।
बेंगलुरु मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक इस शादी के लिए चंदा किया गया है। गांव के हर घर से शादी के लिए पैसे एकत्र किए गए। जिसके बाद इस शादी समारोह का आयोजन हुआ। साथ ही लोगों को शादी में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया गया। स्थानीय लोग इसे अपने रिवाज का एक हिस्सा मानते हैं। उनके मुताबिक लड़कों की शादी का यह रिवाज ‘हाराके’ परंपरा का एक हिस्सा है। पूरे क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए इस पूजा का आयोजन किया जाता है। इसके लिए दो लड़कों का चुना जाता है। उनमें से एक को दुल्हन की तरह साड़ी और बाकी ड्रेस पहनाई जाती है। इस समृद्धि की शुरुआत बारिश के साथ होती है। गांववालों का मानना है कि लड़कों की शादी उनकी समस्याओं को खत्म करने में मदद करती है।




बेंगलुरु के ग्रामीण क्षेत्रों और तुमाकुरु के गांवों में इस तरह की शादी आम बात है, लेकिन इस तरह की शादी का आयोजन गुप्त रखकर किया जाता है। सामान्य तौर पर देखा गया है कि लोग क्षेत्र में अच्छी बारिश के लिए मेढ़कों की शादी कराते हैं। कहीं-कहीं पर गधों की शादी भी कराई जाती है। गौरतलब है कि असम और महाराष्‍ट्र में लोग बारिश के देवता वरूण देव को खुश करने के लिए मेढ़क की पूरे रिति-रिवाज से शादी कराते हैं। शादी के रिवाज खत्‍म होने के बाद लोग इन मेढ़क को आसमान की तरफ उठाते हैं और भगवान से बारिश करने के लिए प्रार्थना करते हैं। इसी तरह कर्नाटक में वरूण देव को खुश करने के लिए दो गधों की शादी करवाते हैं।
Source: http://www.jansatta.com

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