
घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी सतिंदर सिंह पुलिसबल समेत मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने कैंटीन में लगे सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले लिए हैं। इनमें दो नकाबपोश युवक कैंटीन में गोलियां चलाते दिख रहे हैं। 7-8 फायर किए गए। सतपाल को एक जबकि रमेश के सिर में दो गोलियां लगी,जिससे उनकी मौक पर ही मौत हो गई। एसएसपी ने कहा कि यह माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। इसमें चरमपंथी संगठनाें के हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। हर पहलू से जांच जारी है।
वहीं तनाव को देखते हुए पूरा इलाका सील कर दिया है। नामचर्चा घर के आसपास भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है। सतपाल और रमेश जगेड़ा स्थित नामचर्चा घर में कैंटीन में सेवा करते थे। डीएसपी पायल वरिंदरजीत सिंह थिंद ने कहा कि फुटेज में दिख रहे युवकों की तलाश शुरू कर दी है। कैंटीन में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस ने कब्जे में ले ली है। फुटेज में दो युवक रिवॉल्वर से गोली मारते हुए नजर आ रहे हैं। फुटेज में हत्यारों ने मुंह पर कपड़ा बांधा हुआ है। एक अन्य फुटेज में दोनों युवक एक बाइक से नामचर्चा घर की कैंटीन के बाहर उतरते हैं और भीतर घुसकर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर देते हैं। इसके बाद दोनों अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो जाते हैं। ऐसी भी सूचना है कि वारदात के समय कैंटीन के बाहर कुछ और लोग मौजूद थे लेकिन मुंह ढका होने के कारण वे हत्यारों का चेहरा नहीं देख पाए।
डेरा सिरसा के मुखी गुरमीत राम रहीम सिंह की पहली फिल्म एमएसजी रिलीज होने के तुरंत बाद भी इस डेरे पर कुछ लोगों ने पथराव किया था। उस वक्त भी हमलावरों का कोई सुराग नहीं लग पाया था। मंडी अहमदगढ़ में स्थित सौंद सिनेमा में भी इन दिनों एमएसजी 3 दिखाई जा रही है।
सतपाल के दूसरे बेटे महेश ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनके परिवार की किसी के साथ कोई रंजिश नहीं थी। उनके पिता ईंट भट्ठे पर काम करते थे। उनका भाई रमेश का बेल्ट बेचने का काम था। वह खुद एक फैक्टरी में काम करता है। पिता और भाई दोनों वक्त मिलने पर डेरे में सेवा करते थे। पड़ोस में रहने वाले लोगों ने भी कहा कि सतपाल का पूरा परिवार डेरे को समर्पित है। उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं हो सकती। यह हमला सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है। उन्होंने पुलिस से इंसाफ की मांग की है।
