
केंद्रीय रिजर्व पुलिस फॉर्स (सीआरपीएफ) ने छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले के चलते होली नहीं मनाने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत सीआरपीएफ के करीब तीन लाख जवान होली नहीं मनाएंगे। बता दें कि 11 मार्च को सुकमा के भेजी में 60 नक्सलियों ने 219 बटालियन के 112 जवानों पर हमला बोल दिया। इसमें 12 जवान शहीद हो गए थे। सीआपीएफ केसभी केंद्रों को भेजे गए खत में लिखा है, ”सुकमा में हुए दुखद वाकये जिसमें 12 जवान शहीद हो गए के चलते सक्षम प्रशासन ने इच्छा जताई है कि होली से जुड़ा कोई भी रेजिमेंटल कार्यक्रम बटालियन, कंपनी में आयोजित नहीं हो।” साथ ही शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा जाएगा।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस हमले के चलते होली नहीं मनाने का फैसला किया था। हमले की जानकारी मिलने के बाद वे तुरंत रायपुर भी गए थे। साथ ही गृह मंत्रालय, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। हमले के बाद सुरक्षाबलों की ओर से ऑपरेशन चलाया गया था। इसमें मौके से काफी आईईडी, बम और तीर मिले थे। सूत्रों के अनुसार इस हमले के पीछे हिडमा और सोनू नाम के नक्सली कमांडर का हाथ है। अधिकारियों ने बताया कि गश्ती दल को भेज्जी क्षेत्र में बन रहे इंजरम भेज्जी मार्ग की सुरक्षा के लिए रवाना किया गया था। दल में लगभग एक सौ जवान शामिल थे। दल जब भेज्जी और कोत्ताचेरू गांव के मध्य जंगल में था तब नक्सलियों ने पुलिस दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में सीआरपीएफ के 11 जवानों की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि चार अन्य घायल हो गए। एक जवान ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ लंबे समय से नक्सलवाद से लड़ रही है। नरेंद्र मोदी सरकार का दावा है कि उसके सरकार में आने के बाद से नक्सली हिंसा में 40-45 प्रतिशत की कमी आई है। साल 2016 में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा के 37 प्रतिशत मामले थे। इसके बाद झारखंड और बिहार का नंबर आता है। पिछले दो साल में सीआरपीएफ पर यह सबसे बड़ा हमला है। यह हमला उसी दिन हुआ है जब 2014 में बस्तर में हमला हुआ था। उस हमले में 11 सीआरपीएफ जवानों सहित 16 लोग मारे गए थे।
Source: jansatta.com
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस हमले के चलते होली नहीं मनाने का फैसला किया था। हमले की जानकारी मिलने के बाद वे तुरंत रायपुर भी गए थे। साथ ही गृह मंत्रालय, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। हमले के बाद सुरक्षाबलों की ओर से ऑपरेशन चलाया गया था। इसमें मौके से काफी आईईडी, बम और तीर मिले थे। सूत्रों के अनुसार इस हमले के पीछे हिडमा और सोनू नाम के नक्सली कमांडर का हाथ है। अधिकारियों ने बताया कि गश्ती दल को भेज्जी क्षेत्र में बन रहे इंजरम भेज्जी मार्ग की सुरक्षा के लिए रवाना किया गया था। दल में लगभग एक सौ जवान शामिल थे। दल जब भेज्जी और कोत्ताचेरू गांव के मध्य जंगल में था तब नक्सलियों ने पुलिस दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में सीआरपीएफ के 11 जवानों की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि चार अन्य घायल हो गए। एक जवान ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ लंबे समय से नक्सलवाद से लड़ रही है। नरेंद्र मोदी सरकार का दावा है कि उसके सरकार में आने के बाद से नक्सली हिंसा में 40-45 प्रतिशत की कमी आई है। साल 2016 में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा के 37 प्रतिशत मामले थे। इसके बाद झारखंड और बिहार का नंबर आता है। पिछले दो साल में सीआरपीएफ पर यह सबसे बड़ा हमला है। यह हमला उसी दिन हुआ है जब 2014 में बस्तर में हमला हुआ था। उस हमले में 11 सीआरपीएफ जवानों सहित 16 लोग मारे गए थे।
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