(सकल घरेलू उत्पाद) की विकास छह फीसदी से कम होने का अनुमान है, हालांकि अर्थव्यवस्था में नकदी की वापसी तेजी से हो रही है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह जानकारी दी गई।
एसबीआई की इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है, "हमने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी के छह फीसदी से कम 5.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। चौथी तिमाही में ही यह पटरी पर लौट पाएगी और 6.4 फीसदी रहेगी। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 17 में कुल मिलाकर जीडीपी की रफ्तार 6.6 फीसदी रहेगी।"
एसबीआई की मुख्य आर्थिक सलाहकार (आर्थिक अनुसंधान विभाग) सौम्या कांति घोष ने कहा, "हमारा मानना है कि नोटबंदी के कारण विकास दर पर अल्पकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि दीर्घकालिक अवधि में विकास दर बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी।"
तीसरी तिमाही के अनुमान में नोटबंदी के दो महीने भी शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि नवंबर और दिसंबर के महीनों में अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि वित्त वर्ष 2017-18 में पुर्नमुद्रीकरण के बाद अगर मांग वापस जोर पकड़ती है तो विकास दर तेज होगी।