
नई दिल्ली/जालंधर: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डी.एस.जी.एम.सी.) के चुनाव खत्म होने के बाद सत्ताधारी दल शिरोमणि अकाली दल (शिअद-बादल) ने सभी प्रत्याशियों की आपात बैठक बुलाई।
दिल्ली के एक क्लब में हुई बैठक में कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. तथा महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने 1 मार्च को होने वाली मतगणना संबंधी जरूरी एहतियात बरतने की हिदायत दी। साथ ही जरूरत पडऩे पर किसी भी प्रकार की तकनीकी एवं कानूनी मदद के लिए पार्टी कार्यालय में तुरंत संपर्क करने की सलाह दी।
जी.के. ने कहा,‘‘ हम बहुत बेहतर स्थिति में हैं। पूरी एहतियात के साथ मतगणना की ओर ध्यान दें ताकि विरोधी किसी लापरवाही का फायदा न उठा सकें। अकाली दल (बादल) दो-तिहाई से अधिक सीटें जीतेगा।’’बैठक में अकाली दल के प्रभारी व राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा, पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह ने दल की भारी जीत की भविष्यवाणी की।
चुनावी फेर में फंसे सिरसा
दिल्ली की पंजाबी बाग सीट से परमजीत सिंह सरना के खिलाफ डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव में हाथ आजमाने वाले शिअद (बादल) के सीनियर नेता मनजिंदर सिंह सिरसा चुनावी फेर में बुरे फंसे हैं। सिरसा पिछले 3 माह से पंजाब के चुनाव में शिअद (बादल) के प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर काम कर रहे हैं। पंजाब के चुनाव के लिए 4 फरवरी को मतदान प्रक्रिया समाप्त हुई तो उन्हें दिल्ली में जाकर खुद डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव में हाथ आजमाने के लिए मैदान में उतरना पड़ा। फिलहाल डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव के नतीजे का इंतजार है लेकिन सिरसा एक बार फिर अगले 2 माह में लड़े जाने वाले चुनावों की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
दिल्ली की पंजाबी बाग सीट से परमजीत सिंह सरना के खिलाफ डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव में हाथ आजमाने वाले शिअद (बादल) के सीनियर नेता मनजिंदर सिंह सिरसा चुनावी फेर में बुरे फंसे हैं। सिरसा पिछले 3 माह से पंजाब के चुनाव में शिअद (बादल) के प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर काम कर रहे हैं। पंजाब के चुनाव के लिए 4 फरवरी को मतदान प्रक्रिया समाप्त हुई तो उन्हें दिल्ली में जाकर खुद डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव में हाथ आजमाने के लिए मैदान में उतरना पड़ा। फिलहाल डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव के नतीजे का इंतजार है लेकिन सिरसा एक बार फिर अगले 2 माह में लड़े जाने वाले चुनावों की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
अप्रैल में दिल्ली में नगर निगमों के चुनाव के अलावा जरनैल सिंह द्वारा खाली की गई राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर भी उप-चुनाव होने की संभावना है। जरनैल सिंह द्वारा पंजाब की लंबी विधानसभा सीट से मैदान में उतरने के कारण यह सीट खली हुई है। सिरसा 2015 के चुनाव में इस सीट से जरनैल सिंह के हाथों हार गए थे लेकिन इस बार सिरसा अभी से अपनी तैयारी में जुट गए हैं।
चुनाव नेताओं के सियासी जीवन का अहम हिस्सा है। यह बात ठीक है कि पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारी के कारण मैं पिछले कई माह से चुनावी राजनीति में ही व्यस्त हूं लेकिन जनता के साथ जुड़े नेता के लिए यह जरूरी भी है। मैंने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है और दिल्ली गुरुद्वारा चुनाव के नतीजों के बाद दिल्ली में अगले चुनाव के लिए भी मैं तैयार हूं।’ -मनजिंदर सिंह सिरसाPUNJABKESARI.IN
