
मनुष्य धन-दौलत और सुख की प्राप्ति के लिए युगों-युगों से भगवान की आराधना
और पूजा-पाठ करता आ रहा है।आपको ये तो पता ही होगा कि वेदों में सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद है।ऋग्वेद के अनुसार इसमें दिए गए एक कथन में यह कहा गया है कि दशावतार भगवान विष्णु से इंसान ने अपनी सभी प्रकार के कष्टों से निवारण पाने के लिए प्रार्थना की थी।आपको बता दें कि हमारी प्राचीनतम वेद ऋग्वेद में मनुष्य के सभी कष्टों के निवारण के लिए एक मंत्र उपस्थित है जिसका अर्थ सहित पूर्ण वर्णन किया गया है।
वह मंत्र यह है:
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं
भूर्या भर।
भूरिरेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन
आ नो भजस्व राधसि।।
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं
भूर्या भर।
भूरिरेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन
आ नो भजस्व राधसि।।
अर्थ:- इस मंत्र का अर्थ यह है कि मनुष्य श्री जगदीश्वर महाराज नारायण से यह कहते हैं कि
“हे नारायण ! आप दानी हैं,जग के पालनहार हैं,आप सभी के कष्टों को हरने वाले स्वामी हैं।
मैंने अपने बड़े-बुजुर्गो से यह सुना है कि कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से आपको याद करता है या आपके नाम का साधनापूर्वक उच्चारण करता है तो आप उसके सभी कष्टों को जड़ से ख़त्म कर देते हैं।आप उन सब व्यक्तियों की मनोकामना को पूर्ण भी कर देते हैं।”
आपको यह मंत्र रोजाना सुबह दीपक जलाकर सच्चे मन से नारायण का नाम ले कर मंत्र का जाप करे।
“हे नारायण ! आप दानी हैं,जग के पालनहार हैं,आप सभी के कष्टों को हरने वाले स्वामी हैं।
मैंने अपने बड़े-बुजुर्गो से यह सुना है कि कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से आपको याद करता है या आपके नाम का साधनापूर्वक उच्चारण करता है तो आप उसके सभी कष्टों को जड़ से ख़त्म कर देते हैं।आप उन सब व्यक्तियों की मनोकामना को पूर्ण भी कर देते हैं।”
आपको यह मंत्र रोजाना सुबह दीपक जलाकर सच्चे मन से नारायण का नाम ले कर मंत्र का जाप करे।
