महाशिवरात्रि 2017: पढ़ें क्यों मनाया जाता है शिवरात्रि का पर्व और किस तरह पूजापाठ करने से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव
महाश्विरात्रि के त्यौहार लाखों शिव भक्तों द्वारा हर साल मनाया जाता है। 



हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन का त्यौहार का लोगों के लिए बहुत ही महत्व होता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्रा​प्ति होती है। महाशिवरात्रि का अपना एक खास महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विधि विधान के साथ भगवान शिव की अराधना करने से वह बेहद प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। ऐसा तथ्य भी है कि जब माता पार्वती ने उनसे पूछा था कि वह किस चीज से सबसे ज्यादा प्रसन्न होते हैं तो भगवान शिव ने कहा कि जब उनके भक्त उनकी अराधना करते हैं तब वह बेहद प्रसन्न होते हैं।
इस दिन भगवान शिव के भक्त पूरे दिन का उपवास करते हैं और शिवलिंग का दूध, जल और शहद आदि से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हिंदू धर्म में लोग इस दिन को काफी शुभ मानते हैं। इस दिन भक्त सच्चे मन से जो प्रार्थना करते हैं भगवान शिव उनकी वह मनोकामना पूर्ण करते हैं। साथ ही इस व्रत करने वालों को जन्म और मोक्ष के चक्र से मुक्ति पा लेता है। शि​वरात्रि के व्रत का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। विवाहित और अविवाहित महिलाए इस दिन व्रत करती हैं तो पर माता गौरा उन  पर अपनी कृपा बनाती है ताकि उनकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी चल सके।
वहीं अविवाहित लड़कियां इस व्रत करके अच्छे पति की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों में काफी रौनक देखने को मिलती है। इस मंदिरों में भजन कीर्तन का आयोजन तो होता ही  है साथ ही झांकियों भी निकाली जाती हैं। इन झांकियों में शिव लीलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी बहुत सी कथाएँ मिलती हैं जिसके चलते महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

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