फीस ना भरने पर शहीद के बेटे को स्कूल से निकाला, मुआवजे के लिए परिवार काट रहा सरकारी दफ्तरों के चक्कर
जब भी कोई जवान सीमा पर शहीद होता है ! तो सभी राजनेता, मंत्री, जिला अधिकारी शहीद के परिवार के देखभाल के लिए बड़ी बड़ी घोषणाये कर देते है ! पर उसकी चिता जलने के बाद कोई भी सरकारी अधिकारी उसके परिवार को पूछने नहीं जाता ! एक ऐसी ही शहीद की कहानी है जिसने देश की रक्षा के लिए आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी ! पर आज तक उसके परिवार की दशा देखने कोई भी सरकारी अधिकारी नहीं आया ! ये कहानी है शहीद “अखिलेश पाण्डेय” की जो असम राइफल के वीर सैनिक थे !
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“गणेश पाण्डेय” और उनकी पत्नी के एकलौते बेटे अखिलेश पाण्डेय भोजपुर जिले में शाहपुर प्रखंड के कनईली गाँव के निवासी है ! पिता ने अपना सपना पूरा किया जब उन्होंने अपने बेटे अखिलेश को पढ़ा लिखा कर देश की रक्षा करने के लिए सैनिक बनाया ! बाप का मानना था कि बेटा देश की रक्षा करने के साथ साथ उनका सहारा भी बन सके !
अखिलेश 29 असम राइफल में तैनात थे ! अखिलेश के माता पिता नही जानते थे कि एक दिन उनका बेटा उनसे पहले ही इस दुनिया से अलविदा ले लेगा ! अखिलेश देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए ! उनके शहीद होने पर राज्य सरकार ने शहीद अखिलेश के परिवार के लिए मुवावजे की घोषणा कर दी ! पर अखिलेश का परिवार इस मुवावजे को पाने के लिए दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो रहा है ! अखिलेश पाण्डेय 29 असम राइफल में भर्ती होकर मणिपुर के तैनात थे ! 22 मई 2016 को अखिलेश उग्रवादियों के साथ एनकाउंटर में शहीद हुए ! उसके बाद पूरे देश ने उनको श्रद्धांजलि और नमन किया !
सेना की तरफ से जब शहीद अखिलेश पाण्डेय का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गाँव लाया गया तो उनको श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य के कई बड़े राजनेता और जिले के प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए ! और साथ ही साथ शहीद के परिवार के लिए मुवावजे की घोषणा हुई ! मुवावजे में राज्य सरकार ने अपनी तरफ से 5 लाख रूपये देने की घोषणा की ! पर जिला प्रशासन की तरफ से शहीद के परिवार को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की गई !

शहीद अखिलेश के पिता को मुवावजा पाने के लिए राज्य के कई नेताओ और जिला प्रशासन के अधिकारियो के चक्कर काटने पड़े ! पर आज तक उनको ये मुवावजा नहीं मिल सका ! अखिलेश का परिवार आज आर्थिक स्थिति से जूझ रहा है !

शहीद अखिलेश के बेटे के लिए स्कूल में फीस भरने तक के पैसे नहीं है ! इसलिए स्कूल प्रशासन ने उसके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया ! शहीद अखिलेश की बूढ़ी माँ सिर्फ रो कर अपना दुःख हल्का करके की कोशिश कर रही है ! कह सकते है आज एक शहीद के परिवार के सितारे गर्दिश में चल रहे है !

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