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केंद्र सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2015 को मंजूरी दे दी। इस नीति के जरिए देश में ‘सभी को निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले दो साल से लंबित इस स्वास्थ्य नीति को मंजूरी दी है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा गुरुवार को संसद में खुद से एक बयान देकर इस नीति के अहम पहलुओं की जानकारी दे सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत यह नीति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर के दायरे में आने वाले सेक्टरों के फलक को बढ़ाती है और एक विस्तृत रूख का रास्ता तैयार करती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘उदाहरण के तौर पर – अब तक पीएचसी सिर्फ टीकाकरण, प्रसूति-पूर्व जांच एवं अन्य के लिए होते थे। लेकिन अब बड़ा नीतिगत बदलाव यह है कि इसमें गैर-संक्रामक रोगों की जांच और कई अन्य पहलू भी शामिल होंगे।’ सूत्रों ने बताया कि नई नीति के तहत जिला अस्पतालों के उन्नयन पर ज्यादा ध्यान होगा और पहली बार इसे अमल में लाने की रूपरेखा तैयार की जाएगी ।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2015 में क्या है विशेष-
– पब्लिक हेल्थ में अभी जीडीपी का एक फीसदी खर्च किया जाता है, जिसे बढ़ाकर 2.5 फीसदी कर दिया जाएगा।
– शिक्षा के अधिकार की तरह इस नीति का मुख्य उद्देश्य सभी को स्वास्थ्य सेवाएं देना है
– सभी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर काम किया जाएगा।
– गैर संक्रमण वाली बिमारियों के इलाज पर विशेष फोकस किया जाएगा।
– राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति हेल्थ रिसर्च पर और ज्यादा काम करने पर ध्यान दिया जाएगा।
– जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए काम किया जाएगा।
– पब्लिक हेल्थ में अभी जीडीपी का एक फीसदी खर्च किया जाता है, जिसे बढ़ाकर 2.5 फीसदी कर दिया जाएगा।
– शिक्षा के अधिकार की तरह इस नीति का मुख्य उद्देश्य सभी को स्वास्थ्य सेवाएं देना है
– सभी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर काम किया जाएगा।
– गैर संक्रमण वाली बिमारियों के इलाज पर विशेष फोकस किया जाएगा।
– राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति हेल्थ रिसर्च पर और ज्यादा काम करने पर ध्यान दिया जाएगा।
– जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए काम किया जाएगा।
Source: jansatta.com
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